Friday, May 1, 2015

तसल्ली हो जाती है

कभी कोई टूटी-फूटी चीज भी,
अपने पास रख लिया करो ,
लोगों को बड़ी तसल्ली हो जाती है । 
अगर कोई कहे कि इसे अब,
बदल लो यार तो,
ज़रा हँस  के कह दिया करो कि ,
हैसियत नहीं है ,
लोगों को बड़ी तसल्ली हो जाती है । 

हँस-हँस  के महबूबा को गले लगाओगे तो, 
जोड़ी बिखर जायेगी ,
कभी किसी के सामने ,
  दो ताने भी जड़ दिया करो ,
लोगों  को बड़ी तसल्ली हो जाती है । 

बाधाओं से अगर ख़ुशी-ख़ुशी लड़े तो,
बाधाए  और भी बढ़ जाएंगी ,
कभी-कभी उलझनों का ,
बयान भी कर दिया करो ,
लोगों को बड़ी तसल्ली हो जाती है ।

दुनिया में जीना बहुत ही मुश्किल है,
आसान है बड़ा ही मौत ऐ  राही ,
ये कलियुग है सतयुग नहीं ,
अगर अच्छे से जीना है तो,
मरने का नाम भी ले लिया करो ,
 लोगों को बड़ी तसल्ली हो जाती है ।  
  

Thursday, April 30, 2015

एक खत दुश्मन के नाम

मैं तो जीना चाहता था ,
एक गुमनाम सी जिंदगी ,
हर लबों पे मेरा नाम बसाने के लिए,
ऐ दोस्त शुक्रिया !
मैं  तो चला जा रहा था,
मदमस्त सुनसान सी गली में,
इस भीड़ भरी बस्ती में लाकर ,
अनेकों हमराह दिलाने के लिए ,
ऐ दोस्त शुक्रिया !
मैं तो खोया था, मगन था,
एक फूल की ही खुशबू मे ,
अनेकों गुलदस्ते दिलाने के लिए ,
ऐ दोस्त शुक्रिया !
गर तू न होता तो,
मेरे जज्बात,मेरे अफ़साने ,
लोगों तक पहुँचते कैसे ?
मुझे लोगों के बीच,
 साबित करवाने के लिए ,
ऐ दोस्त शुक्रिया !
अच्छा जीवन जीना है तो ,
दोस्त ही काफी नहीं ,
दुश्मनों का होना भी ,
बेहद जरुरी है । 
मुझे तरक्की पे तरक्की,
 दिलाने के लिए ,
ऐ दोस्त शुक्रिया !
तू न होता तो मैं ,
गुमनामी के ढेर में खो जाता,
मुझे इस तरह से ,
महफ़िलों में सजाने के लिए ,
ऐ दोस्त तेरा शुक्रिया! 

Wednesday, April 22, 2015

झाँसी की रानी के किस्से


दर्द गर गैरों से मिलता तो बात ही क्या थी,
हमें तो अपनों ने लूटा है,उसी की सजा पा रहें हैं । 
शिकायत गर करें तो किससे और क्या?
हँस-हँस के गम अपनों का उठा रहें है। 
जब भी बात आई कि अपना और पराया कौन ?
इशारे  दर्द देने वालों की तरफ ही आ रहें है। 
पराया कहें तो किसे कहें ,हम तो अपनों से ही,
हर वक्त जख्म खा रहें है। 
शीशा टूटता है जैसे शीशे से टकराकर ,
बस  वैसे ही अपनों की शक्ल में, पराये की झलक पा रहे  हैं। 
जानते हैं की दोस्त की शक्ल में , दुश्मन हमारे करीब हैं, 
मजबूरी ही है  जो उसके कदम से कदम  मिला रहे हैं। 
ऐसे अपनों से दूर होना, इतना आसान नहीं है,
क्योंकि लोग हमें , ऐसे ही घड़ियों में आजमा रहे हैं। 
आसान सा जीवन अगर जिये  तो क्या जिये ऐ राही ,
महान तो वही लोग हैं, जो काटों पर चलकर अपनी मंजिल पा रहे  हैं। 
दफना भी दो गयी अगर अकेले में तो क्या,
लोग आज भी झाँसी की रानी के किस्से सुना रहे हैं। 

Tuesday, April 21, 2015

माँ


माँ तू ममता की देवी है।
पथ्थर दिल को पिघला दे ,
माँ इतनी तुझमें शक्ति है।
ईश्वर को धरती पर ला दे ,
इतनी तुझमें भक्ति है।

वीर जवाहर गाँधी जैसे ,
कितने तुमने पुत्र जने ।
तेरी ही शिक्षा से तो माँ ,
भगत और आजाद बने।

माँ तू अपने बच्चों को,
अमृतमय जीवन देती है।
माँ तू जीवन को कितना,
पावन-पावन कर देती है।

घाव सभी तन-मन के माँ ,
स्नेह से तू भर देती है।
बुरे वक्त से लड़ने को ,
फौलादी थाती देती है।

युद्ध भूमि में लाल को अपने ,
कैसे विदा कर देती है?
जन-जन की रक्षा को तू,
बलिदान रक्त का देती है।

माँ तू कैसे चुपके-चुपके ,
अपने आँसू पी लेती है?
अपने बच्चों की रक्षा को तू,
प्राण भी दे देती है।

मेरे लिए तो माँ तू ही ,
माँ दुर्गा और सरस्वती है।
माँ तू ममता की देवी है,
माँ तू ममता की देवी है।

Monday, April 13, 2015

एक दीप जला देना



उजड़े चमन में फूल खिला देना ,
बिछड़े दिलों को मिला देना,
यदि इतना भी न कर सको तो ,
अँधेरे में एक दीप  जला  देना । 

दीये की एक किरण ,
हर लेगी तिमिर मन का ,
सारे दोष काफूर हो जाएंगे ,
मिट जाएगा अंधेरा गम का । 

कभी किसी की खुशी को देख ,
अपने सारे गम भुला देना,
यदि इतना भी न कर सको तो,
अंधेरे में एक दीप जला देना। 

मत भटकाना पथ में तुम ,
किसी भी राहगीर को ,
याद रखना अपने मौला को,
और ध्यान में रखना फकीर को । 

रोते हुए को हँसा देना ,
गिरते हुए को उठा लेना ,
गर तुम कुछ न दे पाए तो,
मिलने का पता बता देना ,
यदि इतना भी न कर सको तो,
अंधेरे में एक दीप जला देना।  

नई सुबह



हर सुबह सुहानी होती है ,
अंदाज निराला होता है,
मुस्कुरा के देखो तो ,
कांटे भी फूल लगते हैं ,
अगर आँखे आपकी नम हो ,
जग गम का प्याला लगता है, 

हर सुबह सूरज की किरणे,
इस तन मन को छू जाती हैं ,
जब मन ही  सोया सोया हो ,
ये जग सपना  सा लगता है.
बस  एक नजर प्यार की,
दुश्मन पर भी डालो तो ,
जाने कितने बरसों का वो ,
दोस्त अपना सा लगता है। 
जाने कितने बरसों का वो ,
दोस्त अपना सा लगता है। 
 

सच्चाई

सच्चाई तो सच्चाई है,
एक दिन सामने आती ही है। 
झूठ मन मसोसकर एक दिन,
सच्चाई से लजाती ही है। 
सच्चाई का सीना हमेशा ,
तना हुआ ही रहता है। 
झूठ तो हमेशा ही,
नजरें चुराती ही है,
नजरें झुकाती ही है। 
ये माना कि 
सच्चाई की राह  चलना ,
आसान नहीं है,
बड़ा ही कठिन है,
पर केवल एक ही नहीं ,
बल्कि सारी दुनिया,
अंत में सच्चाई को ,
 अपनाती ही है। 
अंत में सच्चाई को ,
अपनाती ही है।